
वंदेभारतलाइवटीव न्युज 21 मार्च 2026 शनिवार
===-: पंचांग के अनुसार गणगौर का यह पर्व प्रतिवर्ष चैत्र मास शुक्ल पक्ष तृतीया की तिथि पर मनाई जाती है। इस बार गणगौर का यह पर्व शनिवार 21 मार्च 2026 को है। गणगौर को गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र मास शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि के दिन शिव पार्वती की संयुक्त पूजा आराधना व्रत किया जाता है।

इस दिन विवाहित माताएं और कुंवारी कन्याएं मिट्टी से शिव और पार्वती देवी – गणगौर बनाती हैं, और उनकी पूजा आराधना करती हैं। गणगौर तीज पर सुहागिन माताएं अपने पति के दीर्घायु के लिए और कुंवारी कन्याएं सुंदर वर की प्राप्ति के लिए व्रत पूजा करती हैं। पौराणिक मान्यता अनुसार गौरा देवी पार्वती जी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए गणगौर का का व्रत किया था, जिसके बाद भगवान भोलेनाथ शिव, पार्वती को पति के रूप मे मिले। इसी कारण से गणगौर में गौरी को सौभाग्य, दांपत्य सुख और शुभ वर की कामना से पूजा जाता है। गण- भगवान भोलेनाथ शिव का और गौर देवी पार्वती जी का नाम भी है। इसी कारण से गणगौर तीज पर शिव पार्वती जी की संयुक्त रूप से पूजा आराधना की जाती है। इस दिन शिव जी को शुद्ध गंगाजल दूध पंचामृत चंदन बेलपत्र आदि अर्पित किया जाता है, और दूसरे दिन विसर्जन किया जाता है। गणगौर का यह पर्व देवी पार्वती जी से जुड़ा हुआ होने से गौरी की पूजा श्रृंगार सुहाग की सामग्री अर्पित करते हुए की जाती है। सोलह श्रृंगार से देवी पार्वती की पूजा की जाती है। गणगौर पर कई जगह महिलाएँ पारंपरिक लोकगीत गाते हुए गणगौर की प्रतिमा को सिर पर रखकर पवित्र नदी या तालाब तक ले जाती हैं।






